भौतिक विज्ञान
भौतिकी प्राकृतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें द्रव्य (matter) तथा ऊर्जा ( energy) और उसकी परस्पर क्रियाओं का अध्ययन होता है। भौतिकी प्राकृतिक जगत का मूल विज्ञान है, क्योंकि विज्ञान की अन्य शाखाओं का विकास भौतिकी के ज्ञान पर बहुत हद तक निर्भर करता है ।
👉 किसी सतह पर लंबवत (Perpendicular) दिशा में लगाया गया बल (Force), उस सतह के प्रति इकाई क्षेत्रफल (per unit area) पर जितना पड़ता है, उसे दाब (Pressure) कहते हैं।
जब कोई वस्तु किसी सतह पर बल लगाती है, तो वह बल सतह पर बिखरकर लगता है। बल जितने क्षेत्र पर लगेगा, दाब उतना ही बदलेगा।
- दाब का S.I. मात्रक N/m2 होता है, जिसे पास्कल (Pa) भी कहते हैं।
- दाब एक अदिश राशि है।
- Note :- इसमें केवल परिमाण होता है और कोई विशिष्ट दिशा नहीं होती है; यह एक बिंदु पर सभी दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है। हालाँकि बल एक सदिश राशि है, लेकिन दाब को बल और क्षेत्रफल के परिमाण का अनुपात माना जाता है।
1. बल (Force)– बल बढ़ेगा → दाब बढ़ेगा।2. क्षेत्रफल (Area)– क्षेत्रफल बढ़ेगा → दाब घटेगा।– क्षेत्रफल घटेगा → दाब बढ़ेगा।
1. सुई कपड़े में आसानी से घुस जाती है क्योंकि उसकी नोक का क्षेत्रफल बहुत छोटा होता है → जिस कारण से दाब अधिक बनता है।2. ट्रैक्टर के टायर चौड़े होते हैं ताकि बड़ा क्षेत्रफल लेकर खेत की मिट्टी में कम दाब पड़े।3. पानी की टंकी में नीचे के नल पर दाब ज्यादा और ऊपर के नल पर कम होता है → क्योंकि गहराई के साथ दाबाव बढ़ता चला जाता है।
🔹 दाब के प्रकार:-
- सामान्यतया वायुमंडलीय दाब वह दाब होता है, जो पारे के 76 सेमी० लम्बे कॉलम के द्वारा 0°C पर 45° अक्षांश पर समुद्रतल पर लगाया जाता है। यह एक वर्ग सेमी० अनुप्रस्थ काट वाले पारे के 76 सेमी० लम्बे कॉलम के भार के बराबर होता है। वायुमंडलीय दाब का SI मात्रक बार (bar ) होता है।
- 1 बार=102 N/m2
> वायुमंडलीय दाब 102 न्यूटन / मीटर अर्थात् एक बार के बराबर होता है।
पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर वायुमंडलीय दाब कम होता जाता है, जिसके कारण :-
- पहाड़ों पर खाना बनाने में कठिनाई होती है,
- वायुयान में बैठे यात्री के फाउण्टेन पेन से स्याही रिस जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:-
- वायुमंडलीय दाब को बैरोमीटर से मापा जाता है।
- इसकी सहायता से मौसम संबंधी पूर्वानुमान भी लगाया जा सकता है।
- बैरोमीटर का पाठ्यांक जब एका-एक नीचे गिरता है, तो आँधी आने की संभावना होती है।
- बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे नीचे गिरता है, तो वर्षा होने की संभावना होती है।
- बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता है, तो दिन साफ रहने की संभावना होती है।
- द्रव के अणुओं द्वारा बर्तन की दीवार अथवा तली के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को द्रव का दाब कहते हैं । द्रव के अन्दर किसी बिन्दु पर द्रव के कारण दाब द्रव की सतह से उस बिन्दु की गहराई (h) द्रव के घनत्व (d) तथा गुरुत्वीय त्वरण (g) के गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात्
- p (दाब) = h x d x g
द्रवों में दाब के नियम:-
- स्थिर द्रव में एक ही क्षैतिज तल में स्थित सभी बिन्दुओं पर दाब समान होता है।
- स्थिर द्रव के भीतर किसी बिन्दु पर दाब प्रत्येक दिशा में बराबर होता है।
- द्रव के भीतर किसी बिन्दु पर दाब स्वतंत्र तल से बिन्दु की गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है।
- किसी बिन्दु पर द्रव का दाब द्रव के घनत्व पर निर्भर करता है। घनत्व अधिक होने पर दाब भी अधिक होता है।
🫗 द्रव – दाब सम्बन्धी पास्कल का नियम-
पास्कल के नियम का प्रथम कथन : यदि गुरुत्वीय प्रभाव को नगण्य माना जाय तो संतुलन की अवस्था में द्रव के भीतर प्रत्येक बिन्दु पर दबाव समान होता है ।
पास्कल के नियम का द्वितीय कथन : किसी बर्तन में बंद द्रव के किसी भाग पर आरोपित बल, द्रव द्वारा सभी दिशाओं में समान परिमाण में संचरित कर दिया जाता है।पास्कल के नियम पर आधारित कुछ यंत्र हैं : हाइड्रोलिक लिफ्ट, हाइड्रोलिक प्रेस, हाइड्रोलिक ब्रेक आदि।
- द्रव का दाब उस पात्र के आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता जिसमें द्रव रखा जाता है।
गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब का प्रभाव (Effect of Pressure on Melting Point and Boiling Point): –
- गलनांक पर प्रभाव:
(i) गरम करने पर जिन पदार्थों का आयतन बढ़ता है, दाब बढ़ाने पर उनका गलनांक भी बढ़ जाता है; जैसे:- मोम, घी आदि।
(ii) गरम करने पर जिन पदार्थों का आयतन घट जाता है, दाब बढ़ाने पर उनका गलनांक भी कम हो जाता है; जैसे बर्फ।
- क्वथनांक पर प्रभाव :
(i) सभी द्रवों का क्वथनांक दाब बढ़ाने पर बढ़ जाता है।
- ठोस में दबाव उसे संपर्क सतह पर लगता है जहां बाल और क्षेत्रफल प्रभावित होता है और इसकामहत्व इंजीनियरिंग से लेकर दैनिक जीवन के कई क्षेत्र में देखा जा सकता है।
- दाब या दबाव पर वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए अलग-अलग प्रयोग के बारे में बताएं ?